चेतेश्वर पुजारा और कप्तान विराट कोहली के बीच तीसरे विकेट के लिए हुई 170 रनों की साझेदारी ने भारत को मलबर्न मैच में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया. भारत ने सात विकेट के नुकसान पर 443 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित की. मैच में भारत की पकड़ मजबूत है, लेकिन इसके बावजूद फैंस टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली से नाराज हैं. हुआ यूं कि 443 रन के स्कोर पर रवींद्र जडेजा के रूप में टीम इंडिया का सातवां विकेट गिरा.
जिसके बाद भारत के कप्तान विराट कोहली ने टीम इंडिया की पारी घोषित कर दी. उस वक्त रोहित शर्मा 63 रनों पर नाबाद थे और सभवत: उनके पास ऑस्ट्रेलिया की धरती पर अपने पहले टेस्ट शतक को पूरा करने का मौका था, लेकिन कप्तान विराट के इस फैसले से उनके हाथ से यह मौका फिसल गया. कुछ फैंस ने विराट कोहली को राहुल द्रविड़ की तरह भी बताया, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ साल 2004 में खेले गए मुल्तान टेस्ट में उस समय पारी घोषित कर दी जब सचिन 194 रनों पर नाबाद थे
आपको बता दें कि भारत ने सात विकेट के नुकसान पर 443 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित की. दिन का खेल समाप्त होने तक ऑस्ट्रेलिया ने बिना कोई विकेट खोए आठ रन बना लिए हैं. सलामी बल्लेबाज एरॉन फिंच (3 नाबाद) और मार्कस हैरिस (5 नाबाद) क्रीज पर मौजूद हैं. पुजारा और कोहली ने गुरुवार को पहले दिन के स्कोर दो विकेट पर 215 रनों से आगे खेलना शुरू किया और शानदार बल्लेबाजी करते हुए भारत के स्कोर को आसानी से 300 से करीब ले गए.
स्टार्क ने 293 के कुल योग पर कोहली (82) को आउट करके भारतीय टीम को पहला झटका दिया. कोहली, फिंच के हाथों लपके गए. कप्तान ने अपनी पारी में 204 गेंदों का सामना करते हुए नौ चौके लगाए. पुजारा भी ज्यादा देर तक क्रीज पर टिक नहीं पाए और पैट कमिंस ने उन्हें बोल्ड कर पवेलियन वापस भेजा. पुजारा ने 319 गेंदों का सामना करते हुए 10 चौके मारे. इसके बाद, अजिंक्य रहाणे (34) और रोहित शर्मा (नाबाद 63) ने भारतीय पारी को आगे बढ़ाया. रहाणे को बेहतरीन फॉर्म में चल रहे स्पिन गेंदबाज नाथन लियोन ने आउट किया.
छा गए विराट- शतक से चूके, लेकिन रिकॉर्ड्स का लगाया अंबार
रहाणे को पवेलियन वापस भेजने के बाद भी ऑस्ट्रेलिया की मुश्किलें कम नहीं हुईं. रोहित ने रहाणे के जाने के बाद विकेटकीपर ऋषभ पंत के साथ छठे विकेट के लिए 76 रन जोड़े और भारत के स्कोर को 400 के पार ले गए. पंत को 39 के निजी स्कोर पर स्टार्क ने आउट किया. हरफनमौला खिलाड़ी रवींद्र जड़ेजा बल्ले से कुछ खास प्रभाव नहीं डाल पाए. उन्हें चार के निजी स्कोर पर जोश हेजलवुड ने अपना शिकार बनाया.
Thursday, December 27, 2018
Monday, December 17, 2018
पोती सारा की फिल्म देखकर शर्मिला टैगोर ने अमृता को भेजा ये मैसेज
सारा अली खान की फिल्म "केदारनाथ" फैंस और सेलेब्स को पसंद आई है. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी बेहतर प्रदर्शन किया है. लेकिन सारा के लिए सबसे खास है उनकी दादी शर्मिला टैगोर की तरफ से मिला रिस्पॉन्स.
सारा ने एक इंटरव्यू में बताया, "मेरी दादी ने केदारनाथ देखने के बाद मां अमृता सिंह को मैसेज किया. दादी को सभी जानने वालों के फोन कॉल और मैसेज आ रहे हैं. मेरे काम की तारीफ सुनकर वो बहुत खुश हैं. उन्हें मुझ पर गर्व है. लेकिन सबसे खास है कि उन्होंने मां को मैसेज किया. मेरी वजह से परिवार 30 सेकेंड के लिए साथ, वो भी ऐसे हालात में... ये सबसे बड़ी बात है."
करीना-सैफ संग केपटाउन में हॉलीडे एंजॉय कर रहे तैमूर
सारा के काम की तारीफ उनके पापा सैफ अली खान भी कर रहे हैं. सैफ का मानना है, "सारा ने मुझसे कहीं बेहतर डेब्यू किया है. उसका आत्मविश्वास देखकर मैं सरप्राइज हूं. उसने पहली बार में शानदार काम किया है. बता दें सारा अली खान की फिल्म देखने के बाद करीना कपूर ने भी पार्टी देने का प्लान किया है."
कैसे शख्स को डेट करना चाहेंगी सारा अली खान? बताई ये खूबियां
फिल्म की कमाई दो हफ्ते में 50 करोड़ से ज्यादा का आंकड़ा पार कर चुकी है. इस सफलता पर सारा के अपोजिट लीड हीरो, सुशांत सिंह राजपूत ने कहा, "मैं फिल्म के लिए दर्शकों से मिली प्रतिक्रिया से वाकई खुश हूं. जब एक अभिनेता के काम की सराहना की जाती है तो यह अच्छा लगता है. क्योंकि इससे ही उसे प्रोत्साहन मिलता है."
उन्होंने कहा, "फिल्म में हमने जिस तरह हर बारीकी को दिखाया है, वे उससे जुड़ाव महसूस कर रहे हैं और इसकी प्रशंसा कर रहे हैं. एक अभिनेता या फिल्म निर्माता के रूप में हम चाहते हैं कि हम जो भी कहना चाहते हैं वह बिना किसी रुकावट के दर्शकों तक पहुंचे."
दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार को 31 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करना होगा. इस केस में सज्जन कुमार के अलावा बलवान खोखर, कैप्टन भागमल और गिरधारी लाल को दी गई उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई है. वहीं, पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोखर की सजा बढ़ाते हुए 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है. जबकि लोवर कोर्ट ने महेंद्र और किशन को 3-3 साल की सजा दी थी.
आजतक के खास कार्यक्रम 'एजेंडा आजतक 2018' का आज दूसरा दिन है. दूसरे दिन की शुरुआत केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ हुई. '2019 का रोड मैप' सेशन का संचालन रोहित सरदाना ने किया. इस सत्र में नितिन गडकरी ने राम मंदिर के मुद्दे पर भी खुल कर बात की.
नितिन गडकरी ने कहा कि अयोध्या का मुद्दा धर्म का नहीं है, ये जनभावनाओं से जुड़ा है. अगर राम के जन्मस्थान पर मंदिर नहीं बनेगा तो किधर बनेगा. ये भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे में पहले भी था और आज भी है. उन्होंने कहा कि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है लेकिन अभी भी आपसी बातचीत से मुद्दा सुलझ सकता है.
पूर्व बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि हमने जो पालमपुर की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में वादा किया था उसी पर आज ही कायम हैं. लेकिन हम कोर्ट में हैं. गडकरी ने कहा कि राम मंदिर बनाने के तीन रास्ते हैं. पहला सुप्रीम कोर्ट के फैसले से, दूसरा आपसी बातचीत से और तीसरा संसद में कानून लाने से.
सारा ने एक इंटरव्यू में बताया, "मेरी दादी ने केदारनाथ देखने के बाद मां अमृता सिंह को मैसेज किया. दादी को सभी जानने वालों के फोन कॉल और मैसेज आ रहे हैं. मेरे काम की तारीफ सुनकर वो बहुत खुश हैं. उन्हें मुझ पर गर्व है. लेकिन सबसे खास है कि उन्होंने मां को मैसेज किया. मेरी वजह से परिवार 30 सेकेंड के लिए साथ, वो भी ऐसे हालात में... ये सबसे बड़ी बात है."
करीना-सैफ संग केपटाउन में हॉलीडे एंजॉय कर रहे तैमूर
सारा के काम की तारीफ उनके पापा सैफ अली खान भी कर रहे हैं. सैफ का मानना है, "सारा ने मुझसे कहीं बेहतर डेब्यू किया है. उसका आत्मविश्वास देखकर मैं सरप्राइज हूं. उसने पहली बार में शानदार काम किया है. बता दें सारा अली खान की फिल्म देखने के बाद करीना कपूर ने भी पार्टी देने का प्लान किया है."
कैसे शख्स को डेट करना चाहेंगी सारा अली खान? बताई ये खूबियां
फिल्म की कमाई दो हफ्ते में 50 करोड़ से ज्यादा का आंकड़ा पार कर चुकी है. इस सफलता पर सारा के अपोजिट लीड हीरो, सुशांत सिंह राजपूत ने कहा, "मैं फिल्म के लिए दर्शकों से मिली प्रतिक्रिया से वाकई खुश हूं. जब एक अभिनेता के काम की सराहना की जाती है तो यह अच्छा लगता है. क्योंकि इससे ही उसे प्रोत्साहन मिलता है."
उन्होंने कहा, "फिल्म में हमने जिस तरह हर बारीकी को दिखाया है, वे उससे जुड़ाव महसूस कर रहे हैं और इसकी प्रशंसा कर रहे हैं. एक अभिनेता या फिल्म निर्माता के रूप में हम चाहते हैं कि हम जो भी कहना चाहते हैं वह बिना किसी रुकावट के दर्शकों तक पहुंचे."
दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार को 31 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करना होगा. इस केस में सज्जन कुमार के अलावा बलवान खोखर, कैप्टन भागमल और गिरधारी लाल को दी गई उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई है. वहीं, पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोखर की सजा बढ़ाते हुए 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है. जबकि लोवर कोर्ट ने महेंद्र और किशन को 3-3 साल की सजा दी थी.
आजतक के खास कार्यक्रम 'एजेंडा आजतक 2018' का आज दूसरा दिन है. दूसरे दिन की शुरुआत केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ हुई. '2019 का रोड मैप' सेशन का संचालन रोहित सरदाना ने किया. इस सत्र में नितिन गडकरी ने राम मंदिर के मुद्दे पर भी खुल कर बात की.
नितिन गडकरी ने कहा कि अयोध्या का मुद्दा धर्म का नहीं है, ये जनभावनाओं से जुड़ा है. अगर राम के जन्मस्थान पर मंदिर नहीं बनेगा तो किधर बनेगा. ये भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे में पहले भी था और आज भी है. उन्होंने कहा कि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है लेकिन अभी भी आपसी बातचीत से मुद्दा सुलझ सकता है.
पूर्व बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि हमने जो पालमपुर की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में वादा किया था उसी पर आज ही कायम हैं. लेकिन हम कोर्ट में हैं. गडकरी ने कहा कि राम मंदिर बनाने के तीन रास्ते हैं. पहला सुप्रीम कोर्ट के फैसले से, दूसरा आपसी बातचीत से और तीसरा संसद में कानून लाने से.
Friday, December 14, 2018
इस बिग बॉस कंटेस्टेंट से शो के बाद नहीं मिलेंगी दीपिका कक्कड़
बिग बॉस फिनाले से दो हफ्ते दूर है. गुरुवार को शो में घरवालों को अहम टास्क दिया गया. जिसके तहत दीपक ठाकुर और दीपिका कक्कड़ को तीखे सवालों का जवाब देना था. इस दौरान जब दीपिका से पूछा गया कि वे किस बिग बॉस कंटेस्टेंट को शो के बाद बिल्कुल नहीं मिलेंगी, उन्होंने रोमिल चौधरी का नाम लिया.
दीपिका का मानना है कि रोमिल शो जीतने के लिए कुछ भी कर सकते हैं. एक्ट्रेस ने कहा, ''एक बार रोमिल ने मुझसे कहा था कि मैं यहां अपना नाम बनाने आया हूं. अब चाहे वो अच्छा करके हो या बुरा. मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता. रोमिल का ये बयान मेरे जहन में आज भी है. मैं किसी ऐसे इंसान से ताल्लुक नहीं रखना चाहूंगी, जो जीतने के लिए कुछ भी करे.'' वे रोमिल को कहती हैं कि प्लीज आप मेरा नंबर बिल्कुल मत मांगना.
गुरुवार के शो में दीपक और दीपिका ने कई कंटेस्टेंट को आईना दिखाया. कौन कंटेस्टेंट फिनाले में जाने के लायक नहीं हैं? जवाब में दीपक ने श्रीसंत, सुरभि और रोहित का नाम लिया. वहीं दीपिका ने रोमिल, सोमी करणवीर. इस टास्क को दीपिका की रेड टीम ने जीता. टास्क के दौरान रोमिल-श्रीसंत, दीपक-श्रीसंत और करणवीर-श्रीसंत के बीच लड़ाई भी होती है.
श्रीसंत फैमिली वीक के बाद से एग्रेसिव हो गए हैं. गुरुवार के शो में उन्हें बार-बार दूसरों से पंगा लेते हुए देखा गया. मालूम हो कि इस हफ्ते घर से बाहर होने के लिए तीन कंटेस्टेंट नॉमिनेट हुए हैं. इनमें करणवीर बोहरा, रोहित सुचांती और सोमी खान शामिल हैं. इस वीकेंड के वार में शाहरुख खान अपनी फिल्म जीरो का प्रमोशन करने पहुंचेंगे.
बृजेन्द्र ने दूरदर्शन के लिए मर्डर मिस्ट्री फिल्म सिर्फ चार दिन बनाई थी. उन्होंने 2010 में भारत की पहली साइलेंट कॉमेडी गुटर गू को प्रोड्यूस किया था.
अनुपम खेर ने छोड़ा था पद
बता दें, FTII के पूर्व विवादित चेयरमैन गजेंद्र चौहान के हटाए जाने के बाद अनुपम खेर की नियुक्ति की गई थी. लेकिन खेर ने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने इस्तीफे की वजह बिजी शेड्यूल और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स को बताया. खेर को अक्टूबर 2017 में एफटीआईआई का चेयरमैन बनाया गया था. पद छोड़ते वक्त खेर का कहना था कि ''मेरे पास एफटीआईआई को देने के लिए बहुत अधिक समय नहीं है. इसलिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला लिया.''
दीपिका का मानना है कि रोमिल शो जीतने के लिए कुछ भी कर सकते हैं. एक्ट्रेस ने कहा, ''एक बार रोमिल ने मुझसे कहा था कि मैं यहां अपना नाम बनाने आया हूं. अब चाहे वो अच्छा करके हो या बुरा. मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता. रोमिल का ये बयान मेरे जहन में आज भी है. मैं किसी ऐसे इंसान से ताल्लुक नहीं रखना चाहूंगी, जो जीतने के लिए कुछ भी करे.'' वे रोमिल को कहती हैं कि प्लीज आप मेरा नंबर बिल्कुल मत मांगना.
गुरुवार के शो में दीपक और दीपिका ने कई कंटेस्टेंट को आईना दिखाया. कौन कंटेस्टेंट फिनाले में जाने के लायक नहीं हैं? जवाब में दीपक ने श्रीसंत, सुरभि और रोहित का नाम लिया. वहीं दीपिका ने रोमिल, सोमी करणवीर. इस टास्क को दीपिका की रेड टीम ने जीता. टास्क के दौरान रोमिल-श्रीसंत, दीपक-श्रीसंत और करणवीर-श्रीसंत के बीच लड़ाई भी होती है.
श्रीसंत फैमिली वीक के बाद से एग्रेसिव हो गए हैं. गुरुवार के शो में उन्हें बार-बार दूसरों से पंगा लेते हुए देखा गया. मालूम हो कि इस हफ्ते घर से बाहर होने के लिए तीन कंटेस्टेंट नॉमिनेट हुए हैं. इनमें करणवीर बोहरा, रोहित सुचांती और सोमी खान शामिल हैं. इस वीकेंड के वार में शाहरुख खान अपनी फिल्म जीरो का प्रमोशन करने पहुंचेंगे.
बृजेन्द्र ने दूरदर्शन के लिए मर्डर मिस्ट्री फिल्म सिर्फ चार दिन बनाई थी. उन्होंने 2010 में भारत की पहली साइलेंट कॉमेडी गुटर गू को प्रोड्यूस किया था.
अनुपम खेर ने छोड़ा था पद
बता दें, FTII के पूर्व विवादित चेयरमैन गजेंद्र चौहान के हटाए जाने के बाद अनुपम खेर की नियुक्ति की गई थी. लेकिन खेर ने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने इस्तीफे की वजह बिजी शेड्यूल और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स को बताया. खेर को अक्टूबर 2017 में एफटीआईआई का चेयरमैन बनाया गया था. पद छोड़ते वक्त खेर का कहना था कि ''मेरे पास एफटीआईआई को देने के लिए बहुत अधिक समय नहीं है. इसलिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला लिया.''
Monday, December 10, 2018
रुझानों में कांग्रेस को बहुमत, हर 5 साल में सरकार बदलने का ट्रेंड जारी रहने के आसार
राजस्थान विधानसभा की 199 सीटों पर मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों में कांग्रेस 91 और भाजपा 86 सीटों पर आगे चल रही है। अन्य को 22 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं।
अपडेट्स
झालरापाटन में 5 राउंड की गितनी के बाद वसुंधरा राजे 11,000 वोटों से आगे
सचिन पायलट 9 राउंड की गिनती के बाद 26,600 वोटों से आगे।
नाथद्वारा सीट पर 4 राउंड की गिनती के बाद कांग्रेस के सीपी जोशी 445 वोटों से आगे।
पहले राउंड की गिनती के बाद उदयपुर से गिरिजा व्यास 450 वोटों से गुलाबचंद कटारिया से आगे।
सरदारपुरा से अशोक गहलोत आगे।
इस बार राजस्थान विधानसभा चुनाव के रिजल्ट तय करेंगे कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भाजपा को लगातार दूसरे चुनाव में जीत दिला पाती हैं या राज्य में हर पांच साल में सरकार बदलने का 25 साल का सिलसिला बरकरार रहता है। राज्य में इस बार कांग्रेस की तरफ से सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सीएम कैंडिडेट माने जा रहे हैं। दोनों ही इस बार चुनाव मैदान में थे। इनके अलावा कांग्रेस से रमेश डूडी के नाम की भी चर्चा है।
राजस्थान की 199 सीटों पर इस बार 74.08% मतदान हुआ था। राज्य में पिछली बार (75.67%) से 1.52% कम वोटिंग हुई। राज्य के 7 एग्जिट पोल्स में कांग्रेस को आगे दिखाया गया था। सिर्फ एक एग्जिट पोल में भाजपा के आगे रहने का अनुमान लगाया गया था।
25 साल से ट्रेंड : हर चुनाव में बदलती है सरकार
1993 : भाजपा ने 38.60% और 95 सीटें लेकर सत्ता में वापसी की। कांग्रेस को 76 सीटें मिलीं।
1998 : कांग्रेस ने 44.95% वोट लिए। 153 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा को 120 सीटें मिलीं।
2003 : भाजपा ने 39.20% वोट लेकर कांग्रेस को सत्ता से निकाला। भाजपा को 120, कांग्रेस को 56 सीटें मिलीं।
2008 : कांग्रेस ने 36.82% वोट लिए और 96 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा को 78 सीटें मिलीं।
2013 : मोदी लहर में भाजपा ने 46.05% वोट और 163 सीटें लेकर कांग्रेस को 21 सीटों पर समेटा।
66 साल में 14 चुनाव हुए; 13 मुख्यमंत्री बने
इससे पहले राजस्थान में 66 साल में 14 विधानसभा चुनाव हुए थे। सबसे ज्यादा 4 बार मोहन लाल सुखाड़िया और तीन बार भैरोंसिंह शेखावत सीएम रहे थे। सुखाड़िया करीब 16 साल 5 महीने और शेखावत 10 साल 4 महीने सीएम रहे, इन दोनों ने राज्य में करीब 44% समय तक शासन किया।
अपडेट्स
झालरापाटन में 5 राउंड की गितनी के बाद वसुंधरा राजे 11,000 वोटों से आगे
सचिन पायलट 9 राउंड की गिनती के बाद 26,600 वोटों से आगे।
नाथद्वारा सीट पर 4 राउंड की गिनती के बाद कांग्रेस के सीपी जोशी 445 वोटों से आगे।
पहले राउंड की गिनती के बाद उदयपुर से गिरिजा व्यास 450 वोटों से गुलाबचंद कटारिया से आगे।
सरदारपुरा से अशोक गहलोत आगे।
इस बार राजस्थान विधानसभा चुनाव के रिजल्ट तय करेंगे कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भाजपा को लगातार दूसरे चुनाव में जीत दिला पाती हैं या राज्य में हर पांच साल में सरकार बदलने का 25 साल का सिलसिला बरकरार रहता है। राज्य में इस बार कांग्रेस की तरफ से सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सीएम कैंडिडेट माने जा रहे हैं। दोनों ही इस बार चुनाव मैदान में थे। इनके अलावा कांग्रेस से रमेश डूडी के नाम की भी चर्चा है।
राजस्थान की 199 सीटों पर इस बार 74.08% मतदान हुआ था। राज्य में पिछली बार (75.67%) से 1.52% कम वोटिंग हुई। राज्य के 7 एग्जिट पोल्स में कांग्रेस को आगे दिखाया गया था। सिर्फ एक एग्जिट पोल में भाजपा के आगे रहने का अनुमान लगाया गया था।
25 साल से ट्रेंड : हर चुनाव में बदलती है सरकार
1993 : भाजपा ने 38.60% और 95 सीटें लेकर सत्ता में वापसी की। कांग्रेस को 76 सीटें मिलीं।
1998 : कांग्रेस ने 44.95% वोट लिए। 153 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा को 120 सीटें मिलीं।
2003 : भाजपा ने 39.20% वोट लेकर कांग्रेस को सत्ता से निकाला। भाजपा को 120, कांग्रेस को 56 सीटें मिलीं।
2008 : कांग्रेस ने 36.82% वोट लिए और 96 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा को 78 सीटें मिलीं।
2013 : मोदी लहर में भाजपा ने 46.05% वोट और 163 सीटें लेकर कांग्रेस को 21 सीटों पर समेटा।
66 साल में 14 चुनाव हुए; 13 मुख्यमंत्री बने
इससे पहले राजस्थान में 66 साल में 14 विधानसभा चुनाव हुए थे। सबसे ज्यादा 4 बार मोहन लाल सुखाड़िया और तीन बार भैरोंसिंह शेखावत सीएम रहे थे। सुखाड़िया करीब 16 साल 5 महीने और शेखावत 10 साल 4 महीने सीएम रहे, इन दोनों ने राज्य में करीब 44% समय तक शासन किया।
Wednesday, November 21, 2018
क्या अहमद शाह ने असावल जीतकर अहमदाबाद या कर्णावती शहर को बसाया
गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने हाल ही में कहा है कि राज्य सरकार अहमदाबाद का नाम बदलकर कर्णावती करने पर विचार कर रही है.
वहीं, गुजरात के सीएम विजय रुपाणी भी कह चुके हैं कि अहमदाबाद का नाम बदला जा सकता है.
इन बयानों के बाद अहमदाबाद के इतिहास को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. नाम बदलने के पक्ष में खड़े होने वाले और इसकी आलोचना करने वाले अपनी-अपनी तरह से इतिहास की व्याख्या कर रहे हैं.
लेकिन असलियत में अहमदाबाद को बसाए जाने का इतिहास क्या है? क्या ये कर्णावती शहर था जिस पर अहमद शाह ने क़ब्ज़ा करके उसका नाम अहमदाबाद रख दिया?
गुजरात यूनिवर्सिटी में फ़ारसी विभाग के पूर्व प्रमुख छोटूभाई नायक ने अपनी किताब 'हिस्ट्री ऑफ़ इस्लामिक सल्तनत इन गुजरात' में गुजरात के मुसलमान शासकों का ज़िक्र विस्तार से किया है.
आपको ये भी रोचक लगेगा
प्रेमी को मारकर शव के टुकड़ों से बना दी बिरयानी
कश्मीर के सियासी ड्रामे के पीछे आख़िर क्या
बुज़ुर्गों का 'भोग विलास' समाज को क्यों नहीं आता रास?
असली 'ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान' जिनसे डरते थे अंग्रेज़
अपनी किताब में वे लिखते हैं कि गुजरात के पहले स्वतंत्र शासक मुज़फ़्फ़रशाह ने अपने चार लड़कों को दरकिनार करके अपने पोते अहमद शाह को अनहिलवाद (पाटन) के सिंहासन पर बिठा दिया था.
मुज़फ़्फ़रशाह के फ़िरोज़ ख़ान, हैबत ख़ान, सादत ख़ान, तातार ख़ान और शेर ख़ान नाम के पांच बेटे थे. अहमद शाह तातार ख़ान के बेटे थे.
लेकिन अहमद शाह के चाचा इतनी आसानी से अपने अधिकार नहीं खोना चाहते थे.
एडवर्ड क्लाइव बेले अपनी किताब 'द लोकल मौह्मडन डायनेस्टीज़: गुज़रात' में बताते हैं कि फ़िरोज़ ख़ान के बेटे मौदूद उस समय बड़ोदा के गवर्नर थे. ऐसे में वे अहमद शाह के चचेरे भाई थे.
मौदूद और उनके पिता फ़िरोज़ ख़ान ने अहमद शाह के ख़िलाफ़ बग़ावत छेड़ने के लिए अमीर मुस्लिमों को अपने साथ मिलाना शुरू कर दिया.
दो हिंदू सरदारों, जीवनदास खत्री और प्रयागदास ने भी इस प्रयास में फ़िरोज़ ख़ान का समर्थन किया.
छोटूभाई नायक अपनी किताब में बताते हैं कि मालवा के सुल्तान हुशांग शाह ने भी अहमद शाह के ख़िलाफ़ बग़ावत में फ़िरोज़ ख़ान का साथ दिया.
कुछ ज़मीनदारों को अहमद शाह के ख़िलाफ़ लड़ाई में शामिल होने के लिए तोहफ़े के रूप में कुछ घोड़े दिए.
अहमद शाह के ख़िलाफ़ खड़ी होने वाली इस सेना का नेतृत्व मौदूद कर रहे थे और उन्होंने जीवनदास को अपने वज़ीर के रूप में नियुक्त किया.
उन्होंने इस युद्ध में लड़ने के लिए एक सेना खड़ी कर ली. जीवनदास ने पाटन पर हमला करने का सुझाव भी दिया. लेकिन कुछ लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया. कुछ लोगों ने समझौता करने का प्रस्ताव भी रखा.
अब दोनों पक्षों में ये विवाद इतना बढ़ गया कि कुछ लोगों ने इस अभियान से किनारा करके अहमद शाह के साथ हाथ मिला लिया. इसके बाद हुए संघर्ष में जीवनदास खत्री की मौत हो गई.
वहीं, गुजरात के सीएम विजय रुपाणी भी कह चुके हैं कि अहमदाबाद का नाम बदला जा सकता है.
इन बयानों के बाद अहमदाबाद के इतिहास को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. नाम बदलने के पक्ष में खड़े होने वाले और इसकी आलोचना करने वाले अपनी-अपनी तरह से इतिहास की व्याख्या कर रहे हैं.
लेकिन असलियत में अहमदाबाद को बसाए जाने का इतिहास क्या है? क्या ये कर्णावती शहर था जिस पर अहमद शाह ने क़ब्ज़ा करके उसका नाम अहमदाबाद रख दिया?
गुजरात यूनिवर्सिटी में फ़ारसी विभाग के पूर्व प्रमुख छोटूभाई नायक ने अपनी किताब 'हिस्ट्री ऑफ़ इस्लामिक सल्तनत इन गुजरात' में गुजरात के मुसलमान शासकों का ज़िक्र विस्तार से किया है.
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अपनी किताब में वे लिखते हैं कि गुजरात के पहले स्वतंत्र शासक मुज़फ़्फ़रशाह ने अपने चार लड़कों को दरकिनार करके अपने पोते अहमद शाह को अनहिलवाद (पाटन) के सिंहासन पर बिठा दिया था.
मुज़फ़्फ़रशाह के फ़िरोज़ ख़ान, हैबत ख़ान, सादत ख़ान, तातार ख़ान और शेर ख़ान नाम के पांच बेटे थे. अहमद शाह तातार ख़ान के बेटे थे.
लेकिन अहमद शाह के चाचा इतनी आसानी से अपने अधिकार नहीं खोना चाहते थे.
एडवर्ड क्लाइव बेले अपनी किताब 'द लोकल मौह्मडन डायनेस्टीज़: गुज़रात' में बताते हैं कि फ़िरोज़ ख़ान के बेटे मौदूद उस समय बड़ोदा के गवर्नर थे. ऐसे में वे अहमद शाह के चचेरे भाई थे.
मौदूद और उनके पिता फ़िरोज़ ख़ान ने अहमद शाह के ख़िलाफ़ बग़ावत छेड़ने के लिए अमीर मुस्लिमों को अपने साथ मिलाना शुरू कर दिया.
दो हिंदू सरदारों, जीवनदास खत्री और प्रयागदास ने भी इस प्रयास में फ़िरोज़ ख़ान का समर्थन किया.
छोटूभाई नायक अपनी किताब में बताते हैं कि मालवा के सुल्तान हुशांग शाह ने भी अहमद शाह के ख़िलाफ़ बग़ावत में फ़िरोज़ ख़ान का साथ दिया.
कुछ ज़मीनदारों को अहमद शाह के ख़िलाफ़ लड़ाई में शामिल होने के लिए तोहफ़े के रूप में कुछ घोड़े दिए.
अहमद शाह के ख़िलाफ़ खड़ी होने वाली इस सेना का नेतृत्व मौदूद कर रहे थे और उन्होंने जीवनदास को अपने वज़ीर के रूप में नियुक्त किया.
उन्होंने इस युद्ध में लड़ने के लिए एक सेना खड़ी कर ली. जीवनदास ने पाटन पर हमला करने का सुझाव भी दिया. लेकिन कुछ लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया. कुछ लोगों ने समझौता करने का प्रस्ताव भी रखा.
अब दोनों पक्षों में ये विवाद इतना बढ़ गया कि कुछ लोगों ने इस अभियान से किनारा करके अहमद शाह के साथ हाथ मिला लिया. इसके बाद हुए संघर्ष में जीवनदास खत्री की मौत हो गई.
Tuesday, November 6, 2018
आर्थिक जगत में प्रमुख पदों पर 5 भारतीय महिलाएं
ग्लोबल इकोनॉमी में भारतीय मूल की 5 महिलाएं प्रमुख पदों पर जिम्मेदारी निभा रही हैं। गीता गोपीनाथ हाल ही में आईएमएफ की प्रमुख अर्थशास्त्री चुनी गई हैं। वे जनवरी में पद संभालेंगी। इंद्रा नूई ने 12 साल तक अमेरिकी कंपनी पेप्सीको की सीईओ रहने के बाद 3 अक्टूबर को पद छोड़ा है। हालांकि, वे भी अगले साल तक कंपनी की चेयरमैन बनी रहेंगी।
दिव्या सूर्यदेवरा ने एक सितंबर को जनरल मोटर्स की सीएफओ का पद संभाला था। वे जनरल मोटर्स ही नहीं, बल्कि पूरे ग्लोबल ऑटो सेक्टर में पहली महिला सीएफओ हैं। पद्मश्री वॉरियल पिछले 3 साल से चीन की कार कंपनी नियो में सीईओ (यूएस) की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। लीना नायर मार्च 2016 में यूनीलीवर (यूके) की चीफ एचआर ऑफिसर बनीं। यह इत्तेफाक है कि इनमें से लीना (महाराष्ट्र) को छोड़ बाकी चारों मूल रूप से दक्षिण भारत से हैं।
गीता गोपीनाथ: आईएमएफ की पहली महिला चीफ इकोनॉमिस्ट
गीता गोपीनाथ (47) एक अक्टूबर को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) की चीफ इकोनॉमिस्ट चुनी गईं। भारतीय मूल की गीता इस मुकाम तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला और दूसरी भारतीय हैं। उनसे पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी आईएमएफ के प्रमुख अर्थशास्त्री रह चुके हैं।
गीता 2005 से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल स्टडीज और इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर हैं। गीता एक मध्यमवर्गीय मलयाली परिवार से हैं। 8 दिसंबर 1971 को कोलकाता में उनका जन्म हुआ। 1980 में उनका परिवार मैसूर आ गया।
गीता के पिता टीवी गोपीनाथ के मुताबिक, जब वो मैसूर आए तो गीता को हिंदी और अंग्रेजी आती थी। इस बात की आशंका थी कि वह कन्नड़ सीख पाएगी या नहीं? लेकिन गीता और उसकी बहन अनीता ने तीन महीने में कन्नड़ सीख ली। गोपीनाथ के मुताबिक 2016 में गीता जब केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन की आर्थिक सलाहकार चुनी गईं, उस वक्त उन्हें मलयालम भाषा की थोड़ी बहुत समझ थी।
इंद्रा नूई: 12 साल में पेप्सीको का रेवेन्यू 81% बढ़ाया
इंद्रा नूई (62) 2006 में अमेरिका की प्रमुख फूड एंड ब्रेवरेज कंपनी पेप्सीको की पहली महिला सीईओ चुनी गईं। बतौर सीईओ नूई के 12 साल के कार्यकाल में पेप्सीको के रेवेन्यू में 81% तक इजाफा हुआ। 2006 में कंपनी का सालाना रेवेन्यू 35 अरब डॉलर था। पिछले साल यह 65.5 अरब डॉलर रहा था। पिछले 11 साल में कंपनी के शेयरधारकों को 162% रिटर्न मिला। नूई ने इसी महीने 3 अक्टूबर को सीईओ का पद छोड़ दिया लेकिन अगले साल तक चेयरमैन बनी रहेंगी।
दिव्या सूर्यदेवरा ने एक सितंबर को जनरल मोटर्स की सीएफओ का पद संभाला था। वे जनरल मोटर्स ही नहीं, बल्कि पूरे ग्लोबल ऑटो सेक्टर में पहली महिला सीएफओ हैं। पद्मश्री वॉरियल पिछले 3 साल से चीन की कार कंपनी नियो में सीईओ (यूएस) की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। लीना नायर मार्च 2016 में यूनीलीवर (यूके) की चीफ एचआर ऑफिसर बनीं। यह इत्तेफाक है कि इनमें से लीना (महाराष्ट्र) को छोड़ बाकी चारों मूल रूप से दक्षिण भारत से हैं।
गीता गोपीनाथ: आईएमएफ की पहली महिला चीफ इकोनॉमिस्ट
गीता गोपीनाथ (47) एक अक्टूबर को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) की चीफ इकोनॉमिस्ट चुनी गईं। भारतीय मूल की गीता इस मुकाम तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला और दूसरी भारतीय हैं। उनसे पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी आईएमएफ के प्रमुख अर्थशास्त्री रह चुके हैं।
गीता 2005 से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल स्टडीज और इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर हैं। गीता एक मध्यमवर्गीय मलयाली परिवार से हैं। 8 दिसंबर 1971 को कोलकाता में उनका जन्म हुआ। 1980 में उनका परिवार मैसूर आ गया।
गीता के पिता टीवी गोपीनाथ के मुताबिक, जब वो मैसूर आए तो गीता को हिंदी और अंग्रेजी आती थी। इस बात की आशंका थी कि वह कन्नड़ सीख पाएगी या नहीं? लेकिन गीता और उसकी बहन अनीता ने तीन महीने में कन्नड़ सीख ली। गोपीनाथ के मुताबिक 2016 में गीता जब केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन की आर्थिक सलाहकार चुनी गईं, उस वक्त उन्हें मलयालम भाषा की थोड़ी बहुत समझ थी।
इंद्रा नूई: 12 साल में पेप्सीको का रेवेन्यू 81% बढ़ाया
इंद्रा नूई (62) 2006 में अमेरिका की प्रमुख फूड एंड ब्रेवरेज कंपनी पेप्सीको की पहली महिला सीईओ चुनी गईं। बतौर सीईओ नूई के 12 साल के कार्यकाल में पेप्सीको के रेवेन्यू में 81% तक इजाफा हुआ। 2006 में कंपनी का सालाना रेवेन्यू 35 अरब डॉलर था। पिछले साल यह 65.5 अरब डॉलर रहा था। पिछले 11 साल में कंपनी के शेयरधारकों को 162% रिटर्न मिला। नूई ने इसी महीने 3 अक्टूबर को सीईओ का पद छोड़ दिया लेकिन अगले साल तक चेयरमैन बनी रहेंगी।
50 फीट ऊंचे रोबोट्स को बनाया गया पात्र
पेरिस. फ्रांस के टूलो शहर में पिछले चार दिनों से लोग एक अनोखा पौराणिक ड्रामा शो देखने पहुंच रहे हैं। इस शो की खास बात यह है कि इनमें किसी इंसानी कलाकार नहीं, बल्कि 50 फीट लंबे रोबोट्स काे शो का मुख्य पात्र बनाया गया है। 45 टन से ज्यादा भारी इन रोबोटों को बाकायदा शो की स्क्रिप्ट और डायरेक्शन के तहत शहर की गलियों में परफॉर्म कराया गया। फ्रांस के इस पौराणिक शो की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ चार दिनों में इसे देशभर के 6 लाख लोग देखने पहुंच गए।
फ्रांस के ऐतिहासिक ड्रामा गार्डियन ऑफ द टेंपल को ला मशीनिया कंपनी ने आम जनता के बीच प्रदर्शित किया। खास बात यह है कि कंपनी ने अपने खर्च पर रोबोट तैयार किए। 50 फीट का एक विशाल रोबोट बनाने में कंपनी को 15 मिलियन यूरो (करीब 124 करोड़ रुपए) की लागत आई। जबकि कलाप्रेमी टूलो शहर को शो प्रदर्शित कराने के लिए कुल 4.4 मिलियन यूरो (करीब 36 करोड़ रुपए) खर्च करने पड़े। इसके अलावा शो में एक 45 फीट की रोबोट मकड़ी को भी पात्र बनाया गया। हालांकि, कंपनी पहले भी उसे दूसरी जगहों पर इस्तेमाल
शहर के म्यूजियम में ही रखे जाएंगे रोबोट
पौराणिक शो के खत्म होने के बाद कंपनी टूलो में ही एक खास म्यूजियम बनाने की तैयारी में है। इसमें पात्र निभाने वाले रोबोटों को रखा जाएगा। जिस जगह इन्हें रखा जाएगा, उसे हॉल ऑफ मशीन नाम दिया गया है। शहर के अधिकारियों का कहना है कि इस आयोजन ने दुनियाभर को अपनी तरफ आकर्षित किया है। ऐसे में जल्द ही पर्यटक इस तरह के शो देखने टूलो पहुंचेंगे। म्यूजियम के जरिए शहर आसानी से अपनी कमाई बढ़ा सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बाकी कुछ देश भी इस तरह के आयोजन के लिए रोबोट कंपनी से संपर्क करेंगे।
सांसद दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला को पार्टी से बाहर कर दिए जाने के बाद भी अभय चौटाला सार्वजनिक मंचों पर हमले करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। सोमवार को हिसार में आयोजित इनेलो-बसपा जिला सम्मेलन में उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि मेरे जिंदाबाद के नारे मत लगाओ, नारे लगाने हैं तो चौधरी देवीलाल और बाबा साहब अमर रहे के लगाओ, मायावती और ओप्रकाश चौटाला जिंदाबाद के लगाओ। पिछले दिनों कुछ लोग नारे लगाते हुए आए थे बाहर से। नारे लगाकर उन्होंने कहीं न कहीं खेल बिगाड़ने का काम किया। कहीं ऐसा न हो कि तुम मेरे नारे लगाओ और मेरा भी दिमाग खराब हो जाए कि सारा देश तेरे साथ हो गया।
कुछ लोगों को बताया कांग्रेस का पेड वर्कर
उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग खेल बिगाड़ने का काम कर रहे थे। हमने संयम रखा। हमने प्रयास भी किए क्योंकि लोकदल पार्टी का जो संगठन है वो देश में सबसे मजबूत और अनुशासित संगठन माना गया है। ये बात मैंने काफी पहले ही भांप ली थी।
फ्रांस के ऐतिहासिक ड्रामा गार्डियन ऑफ द टेंपल को ला मशीनिया कंपनी ने आम जनता के बीच प्रदर्शित किया। खास बात यह है कि कंपनी ने अपने खर्च पर रोबोट तैयार किए। 50 फीट का एक विशाल रोबोट बनाने में कंपनी को 15 मिलियन यूरो (करीब 124 करोड़ रुपए) की लागत आई। जबकि कलाप्रेमी टूलो शहर को शो प्रदर्शित कराने के लिए कुल 4.4 मिलियन यूरो (करीब 36 करोड़ रुपए) खर्च करने पड़े। इसके अलावा शो में एक 45 फीट की रोबोट मकड़ी को भी पात्र बनाया गया। हालांकि, कंपनी पहले भी उसे दूसरी जगहों पर इस्तेमाल
शहर के म्यूजियम में ही रखे जाएंगे रोबोट
पौराणिक शो के खत्म होने के बाद कंपनी टूलो में ही एक खास म्यूजियम बनाने की तैयारी में है। इसमें पात्र निभाने वाले रोबोटों को रखा जाएगा। जिस जगह इन्हें रखा जाएगा, उसे हॉल ऑफ मशीन नाम दिया गया है। शहर के अधिकारियों का कहना है कि इस आयोजन ने दुनियाभर को अपनी तरफ आकर्षित किया है। ऐसे में जल्द ही पर्यटक इस तरह के शो देखने टूलो पहुंचेंगे। म्यूजियम के जरिए शहर आसानी से अपनी कमाई बढ़ा सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बाकी कुछ देश भी इस तरह के आयोजन के लिए रोबोट कंपनी से संपर्क करेंगे।
सांसद दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला को पार्टी से बाहर कर दिए जाने के बाद भी अभय चौटाला सार्वजनिक मंचों पर हमले करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। सोमवार को हिसार में आयोजित इनेलो-बसपा जिला सम्मेलन में उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि मेरे जिंदाबाद के नारे मत लगाओ, नारे लगाने हैं तो चौधरी देवीलाल और बाबा साहब अमर रहे के लगाओ, मायावती और ओप्रकाश चौटाला जिंदाबाद के लगाओ। पिछले दिनों कुछ लोग नारे लगाते हुए आए थे बाहर से। नारे लगाकर उन्होंने कहीं न कहीं खेल बिगाड़ने का काम किया। कहीं ऐसा न हो कि तुम मेरे नारे लगाओ और मेरा भी दिमाग खराब हो जाए कि सारा देश तेरे साथ हो गया।
कुछ लोगों को बताया कांग्रेस का पेड वर्कर
उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग खेल बिगाड़ने का काम कर रहे थे। हमने संयम रखा। हमने प्रयास भी किए क्योंकि लोकदल पार्टी का जो संगठन है वो देश में सबसे मजबूत और अनुशासित संगठन माना गया है। ये बात मैंने काफी पहले ही भांप ली थी।
Friday, November 2, 2018
क्या है वो टीचर घोटाला जिसकी CBI जांच से फंस सकती है योगी सरकार
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में 68,500 सहायक शिक्षकों की हुई भर्ती सीबीआई जांच के घेरे में है. योगीराज के पौने दो साल के शासन में ये सबसे बड़ी भर्ती थी और उसी पर सवालिया निशान लगने लगे हैं. सरकार सीबीआई जांच से सामने करने के बजाय बचाव में खड़ी नजर आ रही है. ऐसे में योगी सरकार पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
हालांकि विपक्ष में रहते हुए बीजेपी ने अखिलेश सरकार के दौरान हुई भर्तियों को लेकर सवाल खड़े करने के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन किया था. लेकिन अब उन्हीं के सरकार के दामन पर दाग लगा है और सपा योगी सरकार को भ्रष्टाचारी सरकार बता रही है.
सपा के प्रवक्ता सुनील साजन ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में 68,500 शिक्षकों की भर्ती योगी सरकार के भ्रष्टाचार की एक कड़ी का हिस्सा है. प्रदेश जिन अफसरों के दामन पर प्रदेश युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगा योगी सरकार उन्हीं के द्वारा जांच करा रही थी. इससे साबित होता है कि सरकार इस पूरे भ्रष्टाचार में शामिल है.
उन्होंने कहा कि शिक्षक भर्ती में जिस तरह से पास अभ्यर्थियों को जानबूझकर फेल किया गया और मनमाने तरीके से अपने लोगों की भर्ती की गई. इस मामले में शिक्षा मंत्री से लेकर कई अफसर जेल जाएंगे. कोर्ट ने जिन 6 सवाल खड़े किए हैं, उससे योगी सरकार की असलियत लोगों के सामने आ गई है.
योगी सरकार अब शिक्षक भर्ती को सीबीआई जांच कराने के बजाए आदेश को चुनौती देने के लिए डबल बेंच में अपील करने की तैयारी कर रही है. गुरुवार को देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. प्रभात कुमार चर्चा हुई. जिसके बाद डॉ. प्रभात कुमार ने मीडिया से कहा कि जिनको नियुक्ति पत्र मिल चुका है, उनकी नौकरी की सुरक्षा सरकार करेगी.
उन्होंने कहा कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती की सीबीआई जांच कराने की कोई जरूरत नहीं है. क्योंकि भर्ती की उच्च स्तरीय जांच शासन ने खुद कराई है और इसमें कोई आपराधिक कृत्य सामने नहीं आया है.
बता दें कि 68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती में भारी गड़बड़ियों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है. सीबीआई को 6 माह में जांच पूरी करने के लिए कहा है. परीक्षा में धांधलियों, बार कोड के बावजूद उत्तर पुस्तिकाएं बदलने और सही जवाबों पर भी शून्य अंक देने के खिलाफ कोर्ट में सोनिका देवी की याचिका समेत कुल 41 याचिकाएं दायर की गई थी.
जस्टिस इरशाद अली ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए कहा कि परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियां तीन मूल अधिकारों अभिव्यक्ति, जीवन और समानता का हनन करती हैं. बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों के मामले सामने आए, जिन्हें 65 नंबर दिए गए. उनके 3-4 प्रश्नों के जवाब सही होते हुए भी शून्य अंक दिए गए, जिससे वे चयन से बाहर हो गए. सोनिका देवी का तो जानबूझकर चयन नहीं किया गया, इन मामलों को न्यायिक जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता.
हालांकि विपक्ष में रहते हुए बीजेपी ने अखिलेश सरकार के दौरान हुई भर्तियों को लेकर सवाल खड़े करने के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन किया था. लेकिन अब उन्हीं के सरकार के दामन पर दाग लगा है और सपा योगी सरकार को भ्रष्टाचारी सरकार बता रही है.
सपा के प्रवक्ता सुनील साजन ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में 68,500 शिक्षकों की भर्ती योगी सरकार के भ्रष्टाचार की एक कड़ी का हिस्सा है. प्रदेश जिन अफसरों के दामन पर प्रदेश युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगा योगी सरकार उन्हीं के द्वारा जांच करा रही थी. इससे साबित होता है कि सरकार इस पूरे भ्रष्टाचार में शामिल है.
उन्होंने कहा कि शिक्षक भर्ती में जिस तरह से पास अभ्यर्थियों को जानबूझकर फेल किया गया और मनमाने तरीके से अपने लोगों की भर्ती की गई. इस मामले में शिक्षा मंत्री से लेकर कई अफसर जेल जाएंगे. कोर्ट ने जिन 6 सवाल खड़े किए हैं, उससे योगी सरकार की असलियत लोगों के सामने आ गई है.
योगी सरकार अब शिक्षक भर्ती को सीबीआई जांच कराने के बजाए आदेश को चुनौती देने के लिए डबल बेंच में अपील करने की तैयारी कर रही है. गुरुवार को देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. प्रभात कुमार चर्चा हुई. जिसके बाद डॉ. प्रभात कुमार ने मीडिया से कहा कि जिनको नियुक्ति पत्र मिल चुका है, उनकी नौकरी की सुरक्षा सरकार करेगी.
उन्होंने कहा कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती की सीबीआई जांच कराने की कोई जरूरत नहीं है. क्योंकि भर्ती की उच्च स्तरीय जांच शासन ने खुद कराई है और इसमें कोई आपराधिक कृत्य सामने नहीं आया है.
बता दें कि 68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती में भारी गड़बड़ियों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है. सीबीआई को 6 माह में जांच पूरी करने के लिए कहा है. परीक्षा में धांधलियों, बार कोड के बावजूद उत्तर पुस्तिकाएं बदलने और सही जवाबों पर भी शून्य अंक देने के खिलाफ कोर्ट में सोनिका देवी की याचिका समेत कुल 41 याचिकाएं दायर की गई थी.
जस्टिस इरशाद अली ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए कहा कि परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियां तीन मूल अधिकारों अभिव्यक्ति, जीवन और समानता का हनन करती हैं. बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों के मामले सामने आए, जिन्हें 65 नंबर दिए गए. उनके 3-4 प्रश्नों के जवाब सही होते हुए भी शून्य अंक दिए गए, जिससे वे चयन से बाहर हो गए. सोनिका देवी का तो जानबूझकर चयन नहीं किया गया, इन मामलों को न्यायिक जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता.
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