कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को रफ़ाल विमान सौदे में सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी करने के लिए 'खेद' जताया. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि कांग्रेस अध्यक्ष अपनी टिप्पणी में उसका ग़लत हवाला दे रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल को साफ़-साफ़ शब्दों में कहा था कि रफ़ाल मामले की सुनवाई के दौरान कभी भी उसने ये टिप्पणी नहीं की कि 'चौकीदार नरेंद्र मोदी चोर हैं', जैसा कि राहुल गांधी अपने बयानों में उसका (सुप्रीम कोर्ट) हवाला दे रहे हैं.
बीजेपी की सांसद मीनाक्षी लेखी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी और राहुल गांधी के ख़िलाफ़ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की थी. मीनाक्षी लेखी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को 22 अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा था.
इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होनी है.
राहुल गांधी ने 15 अप्रैल के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अपना शपथ पत्र दाखिल किया. शपथ पत्र में कहा गया है कि कोर्ट की अवमानना करना कभी भी उनकी मंशा या इरादा नहीं था. उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान जोश में ऐसा बयान दिया था, जिसका उनके विरोधियों ने दुरुपयोग किया.
राहुल गांधी ने अपने हलफ़नामे में लिखा, "मेरा बयान सियासी प्रचार की गर्मा-गर्मी में दिया गया था. इसे मेरे विरोधियों ने ग़लत ढंग से पेश करके जान-बूझकर ऐसा जताया कि मैंने ये कहा हो कि अदालत ने कहा है कि चौकीदार चोर है. ऐसी सोच तो मेरी दूर-दूर तक नहीं थी, ये भी साफ़ है कि कोई भी अदालत ऐसा कुछ कभी नहीं कहेगी, इसलिए इस दुर्भाग्यपूर्ण संदर्भ (जिसके लिए मैं खेद व्यक्त करता हूँ) को ये न समझा जाए कि अदालत को दिया हुआ कोई निष्कर्ष या टिप्पणी है.."
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी रफ़ाल विमान सौदे पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर यह दावा किया है कि सरकार को इस मामले में 'क्लीन चिट' मिल गई है.
बीजेपी ने राहुल के शपथपत्र पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया है कि देश जानता है कि चौकीदार प्योर है.
राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर कहा कि ग़रीबों को लूटकर अमीर मित्रों को लाभ देने वाले चौकीदार को सज़ा मिलेगी.
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने शपथपत्र देकर सिर्फ़ राजनीतिक फ़ायदे के लिए ख़ेद जताया है. उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें कोर्ट का डर है. निर्मला ने कहा कि राहुल गांधी की विश्वसनीयता खत्म हो गई है.
निर्मला ने कहा कि राहुल गांधी लगातार सार्वजनिक जीवन में रहते हुए झूठ पर झूठ बोल रहे हैं और यह दुख का विषय है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को एक ऐसा अध्यक्ष चला रहा है जो ग़लतबयानबाज़ी पर निर्भर रहता है.
अमेठी में राहुल के ख़िलाफ़ चुनाव मैदान में उतरीं और केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने ट्वीट कर कहा है कि चौकीदार को चोर कहने वाले राहुल गांधी ने आज स्वीकार किया कि वह ख़ुद झूठे हैं.
15 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने मीनाक्षी लेखी की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा था कि वो राहुल के ख़िलाफ़ आपराधिक अवमानना का मामला शुरू करने पर विचार कर सकती है.
याचिका में कहा गया था कि राहुल गांधी अपनी व्यक्तिगत टिप्पणियों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला दे रहे हैं.
भारत और फ्रांस के बीच 2015 में रफ़ाल विमानों के लिए सौदा हुआ था. विमानों की डिलीवरी इसी साल सितंबर में होने की उम्मीद है.
Monday, April 22, 2019
Tuesday, April 16, 2019
मस्जिदों में औरतों के दाख़िले की अनुमति पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट में एक मुस्लिम दंपत्ति ने एक याचिका दाख़िल कर अपील की है कि मस्जिदों में औरतों के दाख़िल होने, एक ही जगह पर मर्दों के साथ नमाज़ पढ़ने का आदेश दिया जाए.
पुणे के इस दंपति के मुताबिक़ उन्हें एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ने से रोका गया था जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राष्ट्रीय महिला आयोग, सेंट्रल वक़्फ़ काउंसिल, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को एक नोटिस जारी किया है.
जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पुणे की दंपति की याचिका को स्वीकार करते हुए यह नोटिस जारी किया है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि "हम आपकी याचिका पर सबरीमला पर हमारे फ़ैसले की वजह से सुनवाई कर सकते हैं."
मौजूदा समय में धर्म औरतों के मस्जिद में दाख़िल होने और मर्दों के साथ नमाज़ पढ़ने के बारे में क्या कहता है?
क्या औरतें मस्जिद में दाख़िल हो सकती हैं?
औरतों के मस्जिद में दाख़िल होने पर क़ुरान में कोई रोक नहीं बताई गई है.
शिया, बोहरा और खोजा मतों वाली मस्जिदों में औरतें आराम से दाख़िल होती हैं.
इस्लाम के सुन्नी मत को माननेवालों में से कई लोग, औरतों का मस्जिद में जाना ठीक नहीं समझते इसलिए सुन्नी मस्जिदों में औरतें नहीं जाती.
हालांकि दक्षिण भारत में कई सुन्नी मस्जिदों में औरतों का जाना आम है.
क्या औरतें मर्दों के साथ नमाज़ पढ़ सकती हैं?
क़ुरान और अरबी भाषा की पढ़ाई अक्सर मस्जिदों में या मस्जिदों से लगे हुए मदरसों में ही होती है और इसमें लड़के-लड़कियां सभी शामिल होते हैं.
नमाज़ पढ़ने और वज़ू करने पर कोई रोक-टोक नहीं है. पर मर्द और औरतों के लिए इसकी जगह अलग-अलग बनाई गई हैं.
कई मस्जिदें मतों के मुताबिक़ नहीं होतीं, ऐसे में शिया-सुन्नी एक ही इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ते हैं.
अगर कोई औरत मस्जिद में नमाज़ पढ़ना चाहे तो इमाम से कह सकती है और इसके लिए उन्हें अलग जगह दे दी जाती है.
याचिकाकर्ताओं ने केरल के सबरीमाला मंदिर में औरतों को जाने की अनुमति देनेवाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया है.
उन्होंने ये भी लिखा है कि मक्का में भी औरतें, मर्दों के साथ काबा की परिक्रमा करती हैं, ऐसे में मस्जिदों में उन्हें मर्दों से अलग हिस्से में रखना ग़लत है.
हालांकि मक्का की मस्जिद में भी नमाज़ पढ़ने और वज़ू करने के लिए मर्द और औरतों के लिए अलग हिस्से तय किए गए हैं.
ऐसा दुनिया की सभी मस्जिदों में किया जाता है.
याचिकाकर्ताओं ने इसे भारतीय संविधान के तहत तय किए गए मूल अधिकारों का उल्लंघन बताया है.
पुणे के इस दंपति के मुताबिक़ उन्हें एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ने से रोका गया था जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राष्ट्रीय महिला आयोग, सेंट्रल वक़्फ़ काउंसिल, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को एक नोटिस जारी किया है.
जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पुणे की दंपति की याचिका को स्वीकार करते हुए यह नोटिस जारी किया है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि "हम आपकी याचिका पर सबरीमला पर हमारे फ़ैसले की वजह से सुनवाई कर सकते हैं."
मौजूदा समय में धर्म औरतों के मस्जिद में दाख़िल होने और मर्दों के साथ नमाज़ पढ़ने के बारे में क्या कहता है?
क्या औरतें मस्जिद में दाख़िल हो सकती हैं?
औरतों के मस्जिद में दाख़िल होने पर क़ुरान में कोई रोक नहीं बताई गई है.
शिया, बोहरा और खोजा मतों वाली मस्जिदों में औरतें आराम से दाख़िल होती हैं.
इस्लाम के सुन्नी मत को माननेवालों में से कई लोग, औरतों का मस्जिद में जाना ठीक नहीं समझते इसलिए सुन्नी मस्जिदों में औरतें नहीं जाती.
हालांकि दक्षिण भारत में कई सुन्नी मस्जिदों में औरतों का जाना आम है.
क्या औरतें मर्दों के साथ नमाज़ पढ़ सकती हैं?
क़ुरान और अरबी भाषा की पढ़ाई अक्सर मस्जिदों में या मस्जिदों से लगे हुए मदरसों में ही होती है और इसमें लड़के-लड़कियां सभी शामिल होते हैं.
नमाज़ पढ़ने और वज़ू करने पर कोई रोक-टोक नहीं है. पर मर्द और औरतों के लिए इसकी जगह अलग-अलग बनाई गई हैं.
कई मस्जिदें मतों के मुताबिक़ नहीं होतीं, ऐसे में शिया-सुन्नी एक ही इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ते हैं.
अगर कोई औरत मस्जिद में नमाज़ पढ़ना चाहे तो इमाम से कह सकती है और इसके लिए उन्हें अलग जगह दे दी जाती है.
याचिकाकर्ताओं ने केरल के सबरीमाला मंदिर में औरतों को जाने की अनुमति देनेवाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया है.
उन्होंने ये भी लिखा है कि मक्का में भी औरतें, मर्दों के साथ काबा की परिक्रमा करती हैं, ऐसे में मस्जिदों में उन्हें मर्दों से अलग हिस्से में रखना ग़लत है.
हालांकि मक्का की मस्जिद में भी नमाज़ पढ़ने और वज़ू करने के लिए मर्द और औरतों के लिए अलग हिस्से तय किए गए हैं.
ऐसा दुनिया की सभी मस्जिदों में किया जाता है.
याचिकाकर्ताओं ने इसे भारतीय संविधान के तहत तय किए गए मूल अधिकारों का उल्लंघन बताया है.
Tuesday, April 9, 2019
राम जन्मभूमि न्यास को जमीन लौटाने की मांग: निर्मोही अखाड़े ने जताई आपत्ति
नई दिल्ली. अयोध्या भूमि विवाद में निर्मोही अखाड़े ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दायर की। इसमें केंद्र सरकार की उस मांग पर आपत्ति जताई है, जिसमे सरकार ने 67 एकड़ अधिगृहित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को लौटाने की अनुमति मांगी है। अखाड़े का कहना है कि इससे वहां मंदिर नष्ट हो जाएंगे, जिनका संचालन अखाड़ा करता है। इसलिए अदालत विवादित भूमि पर फैसला ले।
14 अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर हो रही है। अदालत ने सुनवाई में केंद्र की उस याचिका को भी शामिल किया है, जिसमें सरकार ने गैर विवादित जमीन को उनके मालिकों को लौटाने की मांग की है।
5 जजों की बेंच कर रही सुनवाई
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। इसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर शामिल हैं।
2.77 एकड़ परिसर के अंदर है विवादित जमीन
अयोध्या में 2.77 एकड़ परिसर में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का विवाद है। इसी परिसर में 0.313 एकड़ का वह हिस्सा है, जिस पर विवादित ढांचा मौजूद था और जिसे 6 दिसंबर 1992 को गिरा दिया गया था। रामलला अभी इसी 0.313 एकड़ जमीन के एक हिस्से में विराजमान हैं। केंद्र की अर्जी पर भाजपा और सरकार का कहना है कि हम विवादित जमीन को छू भी नहीं रहे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9 साल पहले फैसला सुनाया था
इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने 30 सितंबर 2010 को 2:1 के बहुमत से 2.77 एकड़ के विवादित परिसर के मालिकाना हक पर फैसला सुनाया था। यह जमीन तीन पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला में बराबर बांट दी गई थी। हिंदू एक्ट के तहत इस मामले में रामलला भी एक पक्षकार हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि जिस जगह पर रामलला की मूर्ति है, उसे रामलला विराजमान को दे दिया जाए। राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह निर्मोही अखाड़े को दे दी जाए। बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए।
इस फैसले को निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने नहीं माना और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
शीर्ष अदालत ने 9 मई 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट में यह केस तभी से लंबित है।
नई दिल्ली. सीएसडीएस-लोकनीति और भास्कर के प्री पोल सर्वे के मुताबिक भाजपा को 50-70 सीटों का नुकसान और कांग्रेस को 20-30 सीट का फायदा संभव है। एनडीए का वोट शेयर 4% तक घट और यूपीए का वोट शेयर 3% तक बढ़ सकता है। वोट शेयर बढ़ने के बावजूद कई सीटों पर विपक्ष के गठबंधन की वजह से भाजपा की सीटों में कमी आ रही है। एक साल में एनडीए की बढ़त में गैर-यूपीए दलों के वोट शेयर में आई गिरावट का योगदान रहा है।
44% किसान एनडीए तो 32% यूपीए के साथ
सर्वे में एक रोचक तथ्य और निकलकर आया है। 40% भारतीय मानते हैं कि देश सही दिशा में है। लेकिन दक्षिणी राज्यों में स्थिति इससे उलट है। 45% लोग कहते हैं- देश गलत दिशा में जा रहा है। पहली बार के वोटर्स की पहली पसंद के रूप में प्रधानमंत्री मोदी (45%) उभरकर आए हैं।
सर्वे कैसे हुआ?
सर्वे 19 राज्यों में 24 से 31 मार्च के बीच किया गया। इसमें 101 लोकसभा क्षेत्रों की 101 विधानसभा सीटों के 10,010 लोगों ने भाग लिया। सर्वे में कुल 46% महिलाएं, 19% अनुसूचित जाति, 10% अनुसूचित जनजाति, 13% मुस्लिम, 2% ईसाई और 3% सिख मतदाता शामिल थे।
14 अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर हो रही है। अदालत ने सुनवाई में केंद्र की उस याचिका को भी शामिल किया है, जिसमें सरकार ने गैर विवादित जमीन को उनके मालिकों को लौटाने की मांग की है।
5 जजों की बेंच कर रही सुनवाई
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। इसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर शामिल हैं।
2.77 एकड़ परिसर के अंदर है विवादित जमीन
अयोध्या में 2.77 एकड़ परिसर में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का विवाद है। इसी परिसर में 0.313 एकड़ का वह हिस्सा है, जिस पर विवादित ढांचा मौजूद था और जिसे 6 दिसंबर 1992 को गिरा दिया गया था। रामलला अभी इसी 0.313 एकड़ जमीन के एक हिस्से में विराजमान हैं। केंद्र की अर्जी पर भाजपा और सरकार का कहना है कि हम विवादित जमीन को छू भी नहीं रहे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9 साल पहले फैसला सुनाया था
इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने 30 सितंबर 2010 को 2:1 के बहुमत से 2.77 एकड़ के विवादित परिसर के मालिकाना हक पर फैसला सुनाया था। यह जमीन तीन पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला में बराबर बांट दी गई थी। हिंदू एक्ट के तहत इस मामले में रामलला भी एक पक्षकार हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि जिस जगह पर रामलला की मूर्ति है, उसे रामलला विराजमान को दे दिया जाए। राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह निर्मोही अखाड़े को दे दी जाए। बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए।
इस फैसले को निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने नहीं माना और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
शीर्ष अदालत ने 9 मई 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट में यह केस तभी से लंबित है।
नई दिल्ली. सीएसडीएस-लोकनीति और भास्कर के प्री पोल सर्वे के मुताबिक भाजपा को 50-70 सीटों का नुकसान और कांग्रेस को 20-30 सीट का फायदा संभव है। एनडीए का वोट शेयर 4% तक घट और यूपीए का वोट शेयर 3% तक बढ़ सकता है। वोट शेयर बढ़ने के बावजूद कई सीटों पर विपक्ष के गठबंधन की वजह से भाजपा की सीटों में कमी आ रही है। एक साल में एनडीए की बढ़त में गैर-यूपीए दलों के वोट शेयर में आई गिरावट का योगदान रहा है।
44% किसान एनडीए तो 32% यूपीए के साथ
सर्वे में एक रोचक तथ्य और निकलकर आया है। 40% भारतीय मानते हैं कि देश सही दिशा में है। लेकिन दक्षिणी राज्यों में स्थिति इससे उलट है। 45% लोग कहते हैं- देश गलत दिशा में जा रहा है। पहली बार के वोटर्स की पहली पसंद के रूप में प्रधानमंत्री मोदी (45%) उभरकर आए हैं।
सर्वे कैसे हुआ?
सर्वे 19 राज्यों में 24 से 31 मार्च के बीच किया गया। इसमें 101 लोकसभा क्षेत्रों की 101 विधानसभा सीटों के 10,010 लोगों ने भाग लिया। सर्वे में कुल 46% महिलाएं, 19% अनुसूचित जाति, 10% अनुसूचित जनजाति, 13% मुस्लिम, 2% ईसाई और 3% सिख मतदाता शामिल थे।
Monday, April 1, 2019
टीएन शेषन: जो 'खाते थे राजनीतिज्ञों को नाश्ते में!'
दिसंबर 1990 की एक ठंडी रात करीब एक बजे केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी की सफ़ेद एम्बैसडर कार नई दिल्ली के पंडारा रोड के एक सरकारी घर के पोर्टिको में रुकी.
ये घर उस समय योजना आयोग के सदस्य टीएन शेषन का था. स्वामी बहुत बेतकल्लुफ़ी से शेषन के घर में घुसे.
वजह ये थी की साठ के दशक में स्वामी शेषन को हारवर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ा चुके थे.
हाँलाकि वो शेषन से उम्र में छोटे थे. उस ज़माने में सुब्रमण्यम स्वामी को हारवर्ड में जब भी दक्षिण भारतीय खाने की तलब लगती थी, वो शेषन के फ़्लैट में पहुंच जाते थे और शेषन उनका स्वागत दही चावल और रसम के साथ किया करते थे.
वो प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के दूत के तौर पर वहाँ पहुंचे थे और आते ही उन्होंने उनका संदेश दिया था, "क्या आप भारत का अगला मुख्य चुनाव आयुक्त बनना पसंद करेंगे?"
शेषन इस प्रस्ताव से बहुत अधिक उत्साहित नहीं हुए थे, क्योंकि एक दिन पहले ही कैबिनेट सचिव विनोद पांडे ने भी उन्हें ये प्रस्ताव दिया था.
और तब शेषन ने विनोद को टालते हुए कहा था, "विनोद तुम पागल तो नहीं हो गए? कौन जाना चाहेगा निर्वाचन सदन में?"
लेकिन जब स्वामी दो घंटे तक उन्हें ये पद स्वीकार करने के लिए मनाते रहे तो शेषन ने उनसे कहा कि वो कुछ लोगों से परामर्श करने के बाद अपनी स्वीकृति देंगे.
टीएन शेषन की जीवनी 'शेषन- एन इंटिमेट स्टोरी' लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार के गोविंदन कुट्टी बताते हैं, "स्वामी के जाने के बाद शेषन ने राजीव गाँधी को फ़ोन मिला कर कहा कि वो तुरंत उनसे मिलने आना चाहते हैं. जब वो उनके यहाँ पहुंचे तो राजीव गाँधी अपने ड्रॉइंग रूम में थोड़ी उत्सुकता के साथ उनका इंतज़ार कर रहे थे."
"शेषन ने उनसे सिर्फ़ पाँच मिनट का समय लिया था, लेकिन बहुत जल्दी ही ये समय बीत गया. राजीव ने ज़ोर से आवाज़ लगाई, 'फ़ैट मैन इज़ हियर.' क्या आप हमारे लिए कुछ 'चॉकलेट्स' भिजवा सकते हैं? 'चॉकलेट्स' शेषन और राजीव दोनों की कमज़ोरी थी."
"थोड़ी देर बाद राजीव गांधी ने शेषन को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद स्वीकार करने के लिए अपनी सहमति दे दी. लेकिन वो इससे बहुत खुश नहीं थे. जब वो शेषन को दरवाज़े तक छोड़ने आए तो उन्होंने उन्हें छेड़ते हुए कहा कि वो दाढ़ी वाला शख़्स उस दिन को कोसेगा, जिस दिन उसने तुम्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाने का फ़ैसला किया था."
वो पहले वन और फिर पर्यावरण मंत्रालय में सचिव थे. वहाँ उन्होंने इतना अच्छा काम किया कि राजीव ने उन्हें आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सुरक्षा सचिव बना दिया.
के गोविंदन कुट्टी बताते हैं, "सुरक्षा सचिव के रूप में शेषन सचिव से कहीं बड़ा काम करने लगे. वो खुद सुरक्षा विशेषज्ञ बन गए. एक बार उन्होंने राजीव गाँधी के मुंह से ये कहते हुए बिस्किट खींच लिया कि प्रधानमंत्री को वो कोई चीज़ नहीं खानी चाहिए, जिसका पहले परीक्षण न किया गया हो."
गोविंदन कुट्टी आगे बताते हैं, "एक बार 15 अगस्त को राजीव गाँधी बहुत से लोगों के साथ विजय चौक से इंडिया गेट तक दौड़ने वाले थे. उन्होंने ट्रैक सूट पहन रखा था. थोड़ी दूरी पर टीएन शेषन बंद गले के सूट और पतलून में सारा इंतज़ाम देख रहे थे."
"राजीव ने उन्हें देख कर मज़ाक किया, 'आप वहाँ क्या सूटबूट पहने खड़े हैं? आइए आप भी हमारे साथ दौड़िए. आपका मोटापा थोड़ा कम हो जाएगा.' शेषन ने तपाक से जवाब दिया, 'कुछ लोगों को सीधे खड़ा होना पड़ता है, ताकि देश का प्रधानमंत्री दौड़ सके.'"
"थोड़ी देर बाद वो हुआ, जिसकी राजीव गाँधी को बिलकुल उम्मीद नहीं थी. अभी वो कुछ ही मिनट दौड़े होंगे कि सुरक्षाकर्मी उनके चारों तरफ़ घेरा बनाते हुए उन्हें एक ऐसी जगह ले आए, जहाँ एक कार खड़ी हुई थी और जिसका इंजन पहले से चालू था."
"उन्होंने राजीव को कार में बैठाया और ये जा... वो जा. एक मिनट में उन्होंने उनको उनके घर पहुंचा दिया. ऐसा करते हुए सुरक्षाकर्मी राजीव से नज़रे नहीं मिला पा रहे थे. लेकिन उन्हें पता था कि उन्हें करना क्या है. शेषन का उन्हें निर्देश था कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए."
ये घर उस समय योजना आयोग के सदस्य टीएन शेषन का था. स्वामी बहुत बेतकल्लुफ़ी से शेषन के घर में घुसे.
वजह ये थी की साठ के दशक में स्वामी शेषन को हारवर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ा चुके थे.
हाँलाकि वो शेषन से उम्र में छोटे थे. उस ज़माने में सुब्रमण्यम स्वामी को हारवर्ड में जब भी दक्षिण भारतीय खाने की तलब लगती थी, वो शेषन के फ़्लैट में पहुंच जाते थे और शेषन उनका स्वागत दही चावल और रसम के साथ किया करते थे.
वो प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के दूत के तौर पर वहाँ पहुंचे थे और आते ही उन्होंने उनका संदेश दिया था, "क्या आप भारत का अगला मुख्य चुनाव आयुक्त बनना पसंद करेंगे?"
शेषन इस प्रस्ताव से बहुत अधिक उत्साहित नहीं हुए थे, क्योंकि एक दिन पहले ही कैबिनेट सचिव विनोद पांडे ने भी उन्हें ये प्रस्ताव दिया था.
और तब शेषन ने विनोद को टालते हुए कहा था, "विनोद तुम पागल तो नहीं हो गए? कौन जाना चाहेगा निर्वाचन सदन में?"
लेकिन जब स्वामी दो घंटे तक उन्हें ये पद स्वीकार करने के लिए मनाते रहे तो शेषन ने उनसे कहा कि वो कुछ लोगों से परामर्श करने के बाद अपनी स्वीकृति देंगे.
टीएन शेषन की जीवनी 'शेषन- एन इंटिमेट स्टोरी' लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार के गोविंदन कुट्टी बताते हैं, "स्वामी के जाने के बाद शेषन ने राजीव गाँधी को फ़ोन मिला कर कहा कि वो तुरंत उनसे मिलने आना चाहते हैं. जब वो उनके यहाँ पहुंचे तो राजीव गाँधी अपने ड्रॉइंग रूम में थोड़ी उत्सुकता के साथ उनका इंतज़ार कर रहे थे."
"शेषन ने उनसे सिर्फ़ पाँच मिनट का समय लिया था, लेकिन बहुत जल्दी ही ये समय बीत गया. राजीव ने ज़ोर से आवाज़ लगाई, 'फ़ैट मैन इज़ हियर.' क्या आप हमारे लिए कुछ 'चॉकलेट्स' भिजवा सकते हैं? 'चॉकलेट्स' शेषन और राजीव दोनों की कमज़ोरी थी."
"थोड़ी देर बाद राजीव गांधी ने शेषन को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद स्वीकार करने के लिए अपनी सहमति दे दी. लेकिन वो इससे बहुत खुश नहीं थे. जब वो शेषन को दरवाज़े तक छोड़ने आए तो उन्होंने उन्हें छेड़ते हुए कहा कि वो दाढ़ी वाला शख़्स उस दिन को कोसेगा, जिस दिन उसने तुम्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाने का फ़ैसला किया था."
वो पहले वन और फिर पर्यावरण मंत्रालय में सचिव थे. वहाँ उन्होंने इतना अच्छा काम किया कि राजीव ने उन्हें आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सुरक्षा सचिव बना दिया.
के गोविंदन कुट्टी बताते हैं, "सुरक्षा सचिव के रूप में शेषन सचिव से कहीं बड़ा काम करने लगे. वो खुद सुरक्षा विशेषज्ञ बन गए. एक बार उन्होंने राजीव गाँधी के मुंह से ये कहते हुए बिस्किट खींच लिया कि प्रधानमंत्री को वो कोई चीज़ नहीं खानी चाहिए, जिसका पहले परीक्षण न किया गया हो."
गोविंदन कुट्टी आगे बताते हैं, "एक बार 15 अगस्त को राजीव गाँधी बहुत से लोगों के साथ विजय चौक से इंडिया गेट तक दौड़ने वाले थे. उन्होंने ट्रैक सूट पहन रखा था. थोड़ी दूरी पर टीएन शेषन बंद गले के सूट और पतलून में सारा इंतज़ाम देख रहे थे."
"राजीव ने उन्हें देख कर मज़ाक किया, 'आप वहाँ क्या सूटबूट पहने खड़े हैं? आइए आप भी हमारे साथ दौड़िए. आपका मोटापा थोड़ा कम हो जाएगा.' शेषन ने तपाक से जवाब दिया, 'कुछ लोगों को सीधे खड़ा होना पड़ता है, ताकि देश का प्रधानमंत्री दौड़ सके.'"
"थोड़ी देर बाद वो हुआ, जिसकी राजीव गाँधी को बिलकुल उम्मीद नहीं थी. अभी वो कुछ ही मिनट दौड़े होंगे कि सुरक्षाकर्मी उनके चारों तरफ़ घेरा बनाते हुए उन्हें एक ऐसी जगह ले आए, जहाँ एक कार खड़ी हुई थी और जिसका इंजन पहले से चालू था."
"उन्होंने राजीव को कार में बैठाया और ये जा... वो जा. एक मिनट में उन्होंने उनको उनके घर पहुंचा दिया. ऐसा करते हुए सुरक्षाकर्मी राजीव से नज़रे नहीं मिला पा रहे थे. लेकिन उन्हें पता था कि उन्हें करना क्या है. शेषन का उन्हें निर्देश था कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए."
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