Tuesday, March 12, 2019

中国两会:央行行长易纲释放信号,货币宽松与贸易谈判

3月10日上午,中国人民银行行长易纲首次以行长身份出现在“两会”记者会上。他回应了关于中美贸易谈判进展,以及2019年中国的货币政策。

易纲透露,中美贸易谈判的确涉及汇率问题。这引发外界联想,中国是否会重蹈日本签署广场协议后的覆辙,也导致中国经济长期萧条?

此外,中国央行从去年底开始大规模降准应对经济放缓,随着中美贸易摩擦的缓和,2019年中国还是继续“放水”吗?

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中美贸易谈判与“广场协议”

中国两会召开之际,中美间的贸易谈判并未停止。此前消息称,中美谈判已经在汇率问题上达成一致。引发中国舆论担忧,汇率条款是否会成为日本与美国在上世纪80年代贸易战后签订的《广场协议》,使中国经济也陷入长期停滞。

从1975年开始,美国共针对日本发起了15次“301调查”,以缩减美日间三四百亿美元的贸易逆差。80年代对日的贸易战并未帮助美国显著减少贸易逆差,美国将原因归结为美元对日元汇率的高估。1985年,美国,日本,法国,英国和联邦德国五国在纽约签署广场协议(The Plaza Accord),联合干预外汇市场,诱导美元对主要货币贬值,以解决美国巨额贸易赤字问题。

广场协议后,为了应对日元升值带来的出口压力,日本积极提振内需,采取宽松的货币政策和积极的财政政策,最终造成疯狂的地产泡沫,使日本陷入“失落的二十年”。

易纲并未正面回应中美达成什么样的汇率协定。他介绍,刚刚结束的第七轮贸易磋商谈判确实就汇率问题进行了讨论,包括四个方面:第一,如何尊重对方货币当局在决定货币政策自主权;第二,双方都应坚持市场决定汇率制度的原则;第三,双方都应遵守历次G20峰会承诺,包括不搞竞争性贬值,不将汇率用于竞争性目的,并就外汇市场保持密切沟通;第四,双方都应按照国际货币基金组织(IMF)的数据透明度标准来承诺披露数据等等。

有学者认为,第二个广场协议之说多少有些无稽之谈,因为中国所面临的国内外环境已与80年代的日本有天壤之别——在国内,中国增长动力已经由出口转向消费,2018年中美零售市场规模相当,而日本1985年零售市场仅为美国的三分之一,零售业市场规模相对较小,对进口消化能力相对较弱,使得日本市场对美国的牵制较小。

中美贸易战开打以来,使中国经济增长逆风航行,同时央行实施了货币宽松政策用以冲抵经济进一步放缓。

2018年初至今,央行一共五次下调存款准备金率,累计下调3.5个百分点。

2019年,中美贸易争端趋缓,那么是否还会继续降准?会降多少?

上一轮连续降准后,中国银行业平均存款准备金率为11%左右,其中农信社的法定准备金率最低可到6%至8%。相比国际而言,易纲介绍,就总的存款准备金率水平来说,美国是12%,欧洲也是12%,而日本更高,超过20%。中国目前的情况是,三档存款准备金率加权平均是11%,而银行的超额存款准备金率只有1%,因此总的准备金率为12%,跟发达国家水平差不多,远低于日本。

因此,易纲表示,“发展中国家有个发展阶段问题,这个阶段中,一定的法定存款准备金率是合适且必要的。我们存准率下调还是有空间的,但是这个空间相较于以前要小多了,这方面要考虑资产配置和风险问题。”

分析人士称,现在中国的准备金率还远未达到甚至接近历史最低水平(6%),如果经济下行的压力持续存在,那么今年底前继续降准将是大概率事件。

但多次降准,也带来副作用。上述分析称,降准最大的副作用就是汇率,货币宽松必然带来汇率的压力。如果未来美联储继续加息,还会加大货币流出压力,影响中国国内的投资。

此外,今年李克强在《政府工作报告》中提到要稳健的货币政策,与去年相比少了"保持中性"四个字,是否意味着今年的货币政策将会偏向宽松呢?

对此,易纲表示,稳健的货币政策的内涵未变,要体现逆周期的调节,同时货币调节在总量上要松紧适度;在结构上要加强对小微企业、民营企业的支持;同时还要兼顾中国在全球经济中的地位来考虑政策。

Wednesday, March 6, 2019

शेर पालना महंगा पड़ा, जान देकर चुकाई कीमत

चेक ​रिपब्लिक के रहने वाले माइकल प्रासेक ने शायद ये सोचा भी न हो कि जिस शेर को वो पाल रहे हैं और प्रशासन से लड़कर भी अपने पास रख रहे हैं, वो उनकी ही जान ले लेगा.

33 साल के माइकल प्रासेक की लाश उसी पिंजरे में मिली जहां उन्होंने अपना प्यारा शेर रखा था.

माइकल प्रासेक अपने घर के पीछे एक शेर और शेरनी को पाल रहे थे. वह साल 2016 में इस शेर को लेकर आए थे और तब उसकी उम्र नौ साल थी. इसके बाद प्रजनन के लिए पिछले साल वो एक शेरनी को भी लेकर आए.

लेकिन माइकल जब इन्हें लेकर आए तो आसपास के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी. उन्हें डर था कि शेर और शेरनी लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

पर इनसे जुड़े जोखिम जानने के बावजूद भी माइकल जानवरों को जीडीशोफ गांव में अपने घर के पीछे बने बाड़ों में रखते रहे.

प्रशासन ने भी उन्हें ऐसे जंगली जानवर रखने की अनुमति नहीं दी थी. पहले उन्हें पिंजरे बनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था और बाद में अवैध प्रजनन के लिए जुर्माना लगाया था.

चेक रिपब्लिक में इन जानवरों को रखने की कोई वैकल्पिक सुविधा न होने और जानवरों के साथ प्रताड़ना के कोई प्रमाण न मिलने की वजह से शेर और शेरनी को वहां से नहीं हटाया जा सका.

इस तरह उन्हें शेर को रखने की मंज़ूरी मिल गई. लेकिन पिछली गर्मियों में माइकल प्रासेक तब ख़बरों में आ गए जब वो अपनी शेरनी को लेकर वॉक पर गए थे और एक साइकिल सवार उनकी शेरनी से टकरा गया था.

इस शेरनी ने अपने ही शेर को मार डाला
शेर की मौत: जंगल के राजा के लिए जगह की माँग
ये मामला पुलिस तक पहुंचा और इसे एक सड़क दुर्घटना का मामला माना गया.

लेकिन फिर वो दिन भी आया जब माइकल के शेर ने अपने मालिक को ही मार दिया. माइकल के पिता को उनकी लाश शेर के पिंजरे में मिली और उन्होंने स्थानीय मीडिया को बताया कि पिंजरा अंदर से बंद था.

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस ने दोनों जानवरों को मार दिया. एक पुलिस प्रवक्ता ने मीडिया को बताया कि माइकल प्रासेक को निकालने के लिए जानवरों को गोली मारना बहुत ज़रूरी था.